لَا إِلٰهَ إِلَّا اللهُ مُحَمَّدٌ رَسُوْلُ اللهِ
أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلٰهَ إِلَّا اللهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيْكَ لَهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُوْلُهُ
سُبْحَانَ اللهِ وَالْحَمْدُ لِلّٰهِ وَلَا إِلٰهَ إِلَّا اللهُ وَاللهُ أَكْبَرُ وَلَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللهِ الْعَلِيِّ الْعَظِيْمِ
لَا إِلٰهَ إِلَّا اللهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيْكَ لَهُ لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ يُحْيِي وَيُمِيْتُ وَهُوَ حَيٌّ لَا يَمُوْتُ أَبَدًا أَبَدًا ذُو الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ بِيَدِهِ الْخَيْرُ وَهُوَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيْرٌ
أَسْتَغْفِرُ اللهَ رَبِّي مِنْ كُلِّ ذَنْبٍ أَذْنَبْتُهُ عَمَدًا أَوْ خَطَأً سِرًّا أَوْ عَلَانِيَةً وَأَتُوْبُ إِلَيْهِ مِنَ الذَّنْبِ الَّذِيْ أَعْلَمُ وَمِنَ الذَّنْبِ الَّذِيْ لَا أَعْلَمُ إِنَّكَ أَنْتَ عَلَّامُ الْغُيُوْبِ وَسَتَّارُ الْعُيُوْبِ وَغَفَّارُ الذُّنُوْبِ فَاغْفِرْ لِيْ
اَللّٰهُمَّ إِنِّي أَعُوْذُ بِكَ مِنْ أَنْ أُشْرِكَ بِكَ شَيْئًا وَأَنَا أَعْلَمُ بِهِ وَأَسْتَغْفِرُكَ لِمَا لَا أَعْلَمُ بِهِ تُبْتُ عَنْهُ وَتَبَرَّأْتُ مِنَ الْكُفْرِ وَالشِّرْكِ وَالْكِذْبِ وَالْغِيْبَةِ وَالْبِدْعَةِ وَالنَّمِيْمَةِ وَالْفَوَاحِشِ وَالْبُهْتَانِ وَالْمَعَاصِيْ كُلِّهَا وَأَسْلَمْتُ وَأَقُوْلُ لَا إِلٰهَ إِلَّا اللهُ مُحَمَّدٌ رَسُوْلُ اللهِ
त्योहार की सच्ची खुशी:
ईद-उल-अजहा का वास्तविक अर्थ त्याग और परोपकार में है। अनाथ और गरीब बच्चों के लिए खाना दान करके, हम न केवल उनकी भूख मिटाते हैं बल्कि उनके चेहरे पर मुस्कान भी लाते हैं। यह एक ऐसा कार्य है जो हमारी आत्मा को सुकून और सच्ची खुशी प्रदान करता है।
समाज की जिम्मेदारी:
समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलना हमारी जिम्मेदारी है। अनाथ और गरीब बच्चे हमारे समाज का वह हिस्सा हैं जिन्हें हमारी मदद की सबसे ज्यादा जरूरत है। इस बकरीद पर, खाना दान करके हम अपनी इस जिम्मेदारी को निभा सकते हैं और समाज को एक बेहतर जगह बना सकते हैं।
प्यार और करुणा का संदेश:
ईद-उल-अजहा का त्योहार प्यार और करुणा का प्रतीक है। अनाथ और गरीब बच्चों के लिए खाना दान करके, हम इस प्यार और करुणा का संदेश पूरे समाज में फैला सकते हैं। यह एक छोटा सा प्रयास है जो दूसरों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।
धार्मिक और सामाजिक कर्तव्य:
खाना दान करना न केवल हमारा धार्मिक कर्तव्य है बल्कि सामाजिक कर्तव्य भी है। इस बकरीद पर, अनाथ और गरीब बच्चों के लिए खाना दान करके, हम अपने धार्मिक और सामाजिक कर्तव्यों का पालन कर सकते हैं और खुद को एक बेहतर इंसान बना सकते हैं।
आशीर्वाद और शुभकामनाएं:
अनाथ और गरीब बच्चों के लिए खाना दान करने से हमें उनके आशीर्वाद और शुभकामनाएं मिलती हैं। यह हमारे जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाने का एक माध्यम बनता है। ईद-उल-अजहा पर दान करना हमें अंदर से मजबूत और खुशहाल बनाता है।
समानता और मानवता का संदेश:
खाना दान करके हम समाज में समानता और मानवता का संदेश फैलाते हैं। अनाथ और गरीब बच्चों के लिए खाना दान करना हमें सिखाता है कि सभी इंसान बराबर हैं और हमें एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए। यह मानवता का एक सुंदर उदाहरण है।
भविष्य के लिए निवेश:
अनाथ और गरीब बच्चों की मदद करके हम उनके भविष्य में निवेश करते हैं। जब हम उन्हें खाना दान करते हैं, तो हम उनकी सेहत और शिक्षा में योगदान करते हैं, जिससे वे एक बेहतर जीवन जीने के काबिल बनते हैं। यह समाज के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
पवित्रता और पुण्य:
बकरीद पर खाना दान करने से हमें पवित्रता और पुण्य की प्राप्ति होती है। यह एक ऐसा कार्य है जो हमें ईश्वर के और करीब लाता है और हमारे जीवन को पवित्र बनाता है। अनाथ और गरीब बच्चों के लिए खाना दान करना हमारे आत्मिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मिलजुल कर मनाएं ईद:
ईद-उल-अजहा का त्योहार मिलजुल कर मनाने का होता है। इस बकरीद पर, आइए हम अनाथ और गरीब बच्चों के लिए खाना दान करके इस त्योहार की खुशी को और भी बढ़ाएं। यह एक ऐसा प्रयास है जो हमें एकजुट करता है और हमारे दिलों में प्यार और समर्पण की भावना जगाता है।
आओ मिलकर खुशियां बांटें:
इस बकरीद पर, हम सभी मिलकर अनाथ और गरीब बच्चों के लिए खाना दान करें और खुशियां बांटें। यह न केवल उन्हें बल्कि हमें भी खुशी और संतोष प्रदान करेगा। आइए, इस पवित्र अवसर पर हम सब एकजुट होकर इस नेक काम में योगदान दें और ईद-उल-अजहा को सच्चे अर्थों में मनाएं।
Reviews
There are no reviews yet.